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पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर बढ़ा सियासी घमासान, चन्द्रशेखर आज़ाद ने कहा—आधी रात की कार्रवाई सत्ता के डर का सबूत

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पटना।पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की देर रात गिरफ्तारी अब सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गई है। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आज़ाद समाज पार्टी के सांसद और भीम आर्मी के प्रमुख चन्द्रशेखर आज़ाद ने खुलकर इस गिरफ्तारी का विरोध किया है और बिहार की एनडीए सरकार पर डर, दमन और बदले की राजनीति का गंभीर आरोप लगाया है।
शनिवार को सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में चन्द्रशेखर आज़ाद ने कहा कि रात के अंधेरे में एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि सत्ता जनता के सवालों से घबरा चुकी है। उन्होंने लिखा कि जो सरकार सवालों का सामना नहीं कर पाती, वही आधी रात को जननेताओं को निशाना बनाती है। उनके अनुसार, यह कानून का शासन नहीं बल्कि सत्ता के अहंकार का प्रदर्शन है।
चन्द्रशेखर आज़ाद ने पप्पू यादव की स्वास्थ्य स्थिति का जिक्र करते हुए सरकार की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बीमारी के बावजूद एक जननेता को इस तरह हिरासत में लेना सत्ता की क्रूर और असंवेदनशील मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार की जनता सब कुछ देख और समझ रही है, और तानाशाही के खिलाफ यह संघर्ष और तेज़ होगा।
इस बीच पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने और अस्पताल ले जाए जाने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। शुक्रवार देर रात 1995 के एक पुराने मामले में गिरफ्तारी के बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए आईजीआईएमएस ले जाया गया था। शनिवार सुबह उन्हें स्ट्रेचर पर पीएमसीएच भेजे जाने की तस्वीरों और सूचनाओं ने माहौल और गर्म कर दिया।
सांसद के निजी सचिव ने सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि पप्पू यादव को पूरी रात आईजीआईएमएस में स्ट्रेचर पर रखा गया और इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। पोस्ट में यह भी कहा गया कि नीट छात्रा के मामले में न्याय की लड़ाई लड़ने की कीमत अब उन्हें चुकानी पड़ रही है। निजी सचिव ने सत्ता और प्रशासन पर साजिश रचने और यहां तक कि जान को खतरे में डालने जैसे आरोप भी लगाए हैं।
वहीं, पुलिस प्रशासन इन आरोपों को खारिज कर रहा है। पटना के सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि यह पूरी कार्रवाई अदालत के आदेश के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि मामला वर्ष 1995 से जुड़ा है और न्यायालय के निर्देश पर ही गिरफ्तारी हुई है। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल पप्पू यादव पुलिस कस्टडी में हैं और शनिवार को उन्हें अदालत में पेश किया जा सकता है।
एक ओर सरकार और पुलिस इस कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह सब एक जननेता की आवाज दबाने की कोशिश है। ऐसे में पप्पू यादव की गिरफ्तारी अब एक व्यक्ति का मामला न रहकर सत्ता, लोकतंत्र और विरोध की आज़ादी से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है।

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